
दशावतार और ज्योतिष
- astroagnimitra

- Nov 16
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भगवान विष्णु के दशावतार को यदि प्रतीकात्मक दृष्टि से देखा जाए, तो वे पृथ्वी पर जीवन के विकासक्रम का अद्भुत दार्शनिक निरूपण प्रतीत होते हैं। मत्स्य अवतार उस अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है जब जीवन केवल जल में था। कूर्म उस संक्रमण काल को दर्शाता है जब अस्तित्व जल से भूमि की ओर बढ़ा। वराह स्थलीय जीवन के पूर्ण रूप से स्थापित होने का संकेत देता है। नरसिंह अवतार में आधा मानव और आधा पशु स्वरूप उस मध्यवर्ती अवस्था का प्रतीक है जहाँ प्राणी बुद्धि और चेतना की ओर अग्रसर हो रहा था, परंतु अभी पूरी तरह मानव नहीं बना था।आगे वामन अवतार मानव जाति के प्रारंभिक और विकासशील रूप को दर्शाता है, जिसने बौद्धिक शक्ति का प्रयोग करना सीखा। परशुराम वह युग है जब मनुष्य ने औजारों और शस्त्रों का निर्माण करके शक्ति के प्रयोग की समझ विकसित की। राम अवतार सामाजिक मर्यादा, नीति और धर्मपरायण जीवन के संगठित मानव का प्रतीक है, जबकि कृष्ण बुद्धि, प्रेम और नीति का समरस रूप हैं—एक संपूर्ण चेतन मानव।
ज्योतिष में सभी ग्रहों को श्री विष्णु के दशावतारों से जोड़ कर देखा गया है यथा सूर्य श्री राम से तो चन्द्र श्री कृष्ण से, शनि कूर्म से तो केतु मीन या मत्स्य से, मंगल नृसिंह से तो बुध बुद्ध से , राहु वाराह से तो शुक्र परशुराम से और देव गुरु बृहस्पति वामन अवतार से संबंधित हैं।
क्या आपने यह देखा कि मीन पहला अवतार और बुद्ध अंतिम अवतार है ( यदि कल्कि को अभी अवतरित होने में समय है) यह भी वैदिक ज्योतिष के दशा क्रम में महत्व रखता है ... केतु के पहली तो बुध की अंतिम दशा होती है !!
ग्रहों की शांति और पूजा विधि में इन संबंधित दशावतारों का महत्व है। संबंधित अवतार रूप की पूजा कर ग्रह विशेष की शांति संभव है। 🙏
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